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ⓘ बेगम हजरत महल



                                               

मोतीलाल नेहरू

मोतीलाल नेहरू इलाहाबाद के एक प्रशिद्ध वकील छल। ओ भारतक प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरूक पिता छल। ओ भारतक स्वतन्त्रता सङ्ग्रामक आरम्भिक कार्यकर्तासभमे सँ छल। १९२८ सँ १९२९ तक पूरा दुई वर्षतक ओ कांग्रेसक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहल।

बेगम हजरत महल
                                     

ⓘ बेगम हजरत महल

बेगम हजरत महल जे अवधक बेगमक नाम सँ सेहो परिचित छल। ओ अवधक नवाब वाजिद अली शाहक दोसर घरवाली छल। अङ्ग्रेजसभद्वारा कलकत्तामे अपन पतिकेँ देशनिकाला करि देलाक बाद बेगम हजरत महलक समर्थकसभक एक समूह पुनः लखनउमे कब्जा जमेने छल। अपन राज्यकेँ अङ्ग्रेज शासकसभक कब्जा सँ बचेबाक लेल ओ अपन पुत्र नवाबजादा बिरजिस काद्रकेँ अवधक शासक नियुक्त करवाक लेल प्रयास केनए छल मुदा हुनकर ओ प्रयास जल्दिए हुनकर शासनकाल अन्त्य भेलाक कारण असफल भऽ गेल छल। बेगम सन् १८५७ मे भारतीय विद्रोहक समयमे ब्रिटिस इस्ट इन्डिया कम्पनीकेँ विरुद्ध विद्रोह केनए छल। अन्तत: हुनका नेपालमे शरण भेटल जतय हुनकर सन् १८७९ मे ५९ वर्षक उमरमे मृत्यु भेल छल।

                                     

1. जीवनी

बेगम हजरत महलक नाम मुहम्मदी खानुम छल आ हुनकर जन्म फैजाबाद, अवधमे भेल छल। ओ पेशा सँ एक तवायफ मुगल शासनकालक समयमे शाही वेश्या छल आ अप्पन माए बापद्वारा बेचल गेलाक बाद ओ ख्वासीनक‍ रूपमे शाही हरममे एक पुरुषक सङ्ग कयन महिलासभ बैसऽवला एक स्थान जतय अन्य पुरुषकेँ प्रवेश निषेध कएल जाएत अछि बैसैत आएल छल तखन हुनका शाही अधिकारीसभ सङ्गे बेचल गेछल मुदा पाछा जाए हुनका परीकेँ रूपमे पदोन्नति कएल गेल छल। बेगम हजरतकेँ पदोन्नति भेलाक बाद हुनका महक परीकेँ रूपमा चिन्हल जाए लागल छल। अवधक नवाबक शाही रखैलक रुपमे स्वीकार कएल गेलाक बाद हुनका बेगमक तक्मा देल गेछल आ हुनकर पुत्र बिरजिस कद्रक जन्म पश्चात् हुनका हरजत महलक उपाधि देल गेल छल।

ओ अन्तिम ताजदर-ए-अवध, वानिद अली शाहक कनकिरबी घरवाली छल। सन् १८५६ मे अङ्ग्रेजसभद्वारा अवधमे कब्जा जमाए लेलाक बाद वाजिद अली शाहकेँ कलकत्तामे देशनिकाला कएल गेल छल। कलकत्तामे हुनकर घरवालाकेँ देशनिकाला कएल गेलाक बाद बेगम आ वानिद अली शाह वीच सम्बन्ध विच्छेद भऽ गेल मुदा बेगम हरजत महल तहियो अवधक राजकीय मामलासभ देखैत रहैत छल।

                                     

1.1. जीवनी सन् १८५७ भारतीय क्रान्ति

स्वतन्त्रताक पहिल युद्धक समय सन् १८५७ सँ सन् १८५८ धरि राजा जयलाल सिंहक नेतृत्वमे बेगम हजरत महलक एक समर्थन समूह ब्रिटिस इस्ट इन्डिया कम्पनीकेँ विरुद्धमे आवाज उठबैलेल सुरु केनए छल तँ बादमे ओ समूह लखनउमे पुनः कब्जा जमेबाऽमे सफल रहल छल आ ओ समूहसभ बेगम हजरत महलक पुत्र बिरजिस कद्रकेँ अवधक शासकक रूपमे घोषित केनए छल।

बेगम हजरत महलक प्रमुख मुद्दासभमे एक ई छल कि इस्ट इन्डिया कम्पनीद्वारा सडक निर्माणक समयमे मन्दिर तथा मस्जिदसभकेँ आंशिक रूपमे ध्वस्त बनाएल गेल छल। विद्रोहक अन्तिम दिनमे जारी कएल गेल एक घोषणामे, ओसभ अङ्ग्रेज सरकारद्वारा धार्मिक स्वतन्त्रताक अनुमति देवाक आस्वासनक खिल्ली उड़ेने छल।

                                     

1.2. जीवनी अन्तिम जीवन

अप्पन जीवक अन्तिम दिस बेगम हजरत महल नेपालमे आबि शरण लेनए छल जतय हुनका पहिल राणा प्रधानमन्त्री जङ्गबहादुर राणा शरण दै कऽ लेल अस्वीकार केनए छल मुदा पाछा हुनका नेपालमे शरण भेटल छल। सन् १८७९ मे बेगमक मृत्यु नेपालक राजधानी काठमाण्डौमे भेछल आ हुनका जामे मस्जिदक मैदानमे एक अज्ञात स्थानमे गाड़ल गेल छल। हुनकर मृत्यु पश्चात् रानी भिक्टोरियाकेँ जयन्तीक अवसरमे बेलायती सरकारद्वारा बिरजिस कद्रकेँ माफ करैत हुनका घर आपसीकेँ आज्ञा देनए छल।

प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता सङ्ग्राम, १८५७
                                               

प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता सङ्ग्राम, १८५७

१८५७ कऽ भारतीय विद्रोह, जकरा प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता सङ्ग्राम, सिपाही विद्रोह आ भारतीय विद्रोह कऽ नामसँ सेहो जानल जाइत अछि । ब्रिटिश शासनक विरुद्ध एक सशस्त्र विद्रोह छल । ई विद्रोह दुई वर्ष धरि भारतक विभिन्न क्षेत्रसभमे चलल छल । ई विद्रोहक आरम्भ छावनी क्षेत्रसभमे छोट झड़प तथा आगजनीसँ भेछल मुदा जनवरी मासमे आबि ई पैग रूप लऽ लेलक ।

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